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सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई में होगी पीएम की सुरक्षा में सेंध की जांच

Bystaff

Jan 10, 2022

पंजाब दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में सेंध के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुवाई वाली एक समिति करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने आज की सुनवाई में जांच कमिटी का गठन कर दिया है। उसने कहा कि समिति में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के डीजी और इंटिलेजेंस ब्यूरो (IB) की पंजाब यूनिट के एडिशनल डीजी भी शामिल होंगे। चीफ जस्टिस एनवी रमन की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच की तरफ से आज हुई मामले की सुनवाई के दौरान किसने क्या दलीलें दीं, आइए जानते हैं।

मामले में याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट ने कहा- उम्मीद है कि रजिस्ट्रार जनरल ने कुछ रिपोर्ट सौंपी दी होगी।

चीफ जस्टिस रमन- हमें रात 10 बजे कंप्लायंस रिपोर्ट मिली है।

याचिकाकर्ता- तब हम इस पर परसों बहस कर सकते हैं।

चीफ जस्टिस- राज्य (पंजाब) के एडवोकेट जनरल कहां हैं?

सीनियर एडवोकेट डीएस पटवालिया- रजिस्ट्रार जनरल ने इन रिकॉर्ड्स को रिकॉर्ड पर रख लिया है। जहां तक बात जज के खिलाफ आरोपों की है तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले में ऐसा कुछ भी नहीं है। लगता है कि कुछ राजनीति हुई है।

पटवालिया ने कहा- एसएसपी को सात कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा गया है कि आखिर उन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए। मुझे पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। जब कार्यवाही रोक दी गई तो फिर ये कारण बताओ नोटिस कहां से आ गए। मुझे तो केंद्र सरकार की जांच समिति से न्याय नहीं मिलेगा। मामले की स्वतंत्र जांच की जरूरत है।

सीजेआई- कारण बताओ नोटिस में क्या लिखा है, पढ़िए।

पटवालिया- पंजाब के मुख्य सचिव के नाम जारी शो कॉज नोटिस में कहा गया है कि एसपीजी एक्ट के तहत दी गई जिम्मेदारी का पहली नजर में पालन होता नहीं दिखा है और बेरोक-टोक वीवीआईपी ट्रेवल की व्यवस्था नहीं की गई।

पटवालिया- कारण बताओ नोटिस में हमारे खिलाफ हर चीज का अंदाजा लगाया गया है। मुझे नहीं लगता है कि निष्पक्ष सुनवाई होगी। निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले ये नोटिस जारी किए गए थे। हमें आपको वह कानून बताना है जिसके अंदर नोटिस जारी किया गया था। देखिए, यहां कुछ गलतफहमियां पैदा हुई हैं। कृपया एसपीजी एक्ट के तहत सुरक्षा की परिभाषा को देखिए… इसका मतलब है कि एसपीजी सिर्फ नजदीकी सुरक्षा करेगा। अब बताइए कि डीजी की क्या भूमिका है। प्रसीजर के लिए एक ब्लू बुक है।

इस बीच बेंच में शामिल जस्टिस हिमा कोहली, अन्य जजों से बातचीत करती हैं। तब तक सॉलिसिटर जनरल अपना स्क्रीन शेयर करते हैं।

एसजी- पीएम का काफिला आंदोलन स्थल से 100 मीटर दूर पहुंचा। ब्लू बुक के मुताबिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वो नियमों का कड़ाई से पालन करवाएं और राज्य सरकार का दायित्व है कि वो अधिकारियों को निर्देश दे ताकि कम से कम असुविधा हो। पर्याप्त सुरक्षा बल की तैनाती करके भीड़ को पूरी तरह नियंत्रित किया जाना चाहिए था। पीएम के काफिले को नहीं बताया गया कि मौके पर भीड़ इकट्ठा हो रही है। अगर खतरे की आशंका थी तो पीएम को तुरंत वहां से हटाया जाना चाहिए था।

एसजी- यह पूरी तरह इंटेलिजेंस फेल्योर का मामला है। कुछ मामलों में डीजी और सीएस प्रधानमंत्री के साथ ट्रेवल करते हैं ताकि कम्यूनिकेशन सिस्टम में कोई बाधा नहीं आए और सुनिश्चित किया जाता है कि सड़क पूरी तरह साफ हो। अगर सड़क कहीं भी जाम हो तो गाड़ियां 4-5 किमी पहले ही रोक दी जाती हैं। इतना तो तय है कि राज्य जिन मामलों में अपना बचाव कर रही है, वो काफी गंभीर हैं। केंद्र सरकार की जांच समिति पता करेगी कि गड़बड़ी कहां हुई।

एसजी- पीएम हेलिकॉप्टर से नहीं बल्कि गाड़ियों से जाएंगे, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया था। एसपीजी ने डीजीपी से बात की थी और उनसे पूछा था कि क्या रूट क्लियर है। ये सब बातें राज्य पुलिस भी स्वीकार कर रही है। सुनवाई तो इस बात की हो रही है कि मामले में क्या अनुशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।

बेंच में शामिल जज आपसे में बात करते हैं। फिर जस्टिस सूर्यकांत सॉलिसिटर जनरल से कहते हैं कि केंद्र सरकार की तरफ से जारी कारण बताओ नोटिस अपने आप में विरोधाभासी है। समिति गठित करके आप जांच करवाना चाहते हैं कि क्या एसपीजी एक्ट का उल्लंघन हुआ है। दूसरी तरफ आप चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी को दोषी भी बता देते हैं। उन्हें किसने दोषी बताया? डीजीपी और सीएस हमारी सुनवाई में एक पक्ष हैं। हम पता करेंगे कि वो मामले में दोषी हैं या नहीं। याचिकाकर्ता मामले की निष्पक्ष जांच चाहता है और आप भी इसका विरोध नहीं करेंगे। तो आप फिर ये सब क्यों कर रहे हैं?

सीजेआई- अगर आप पंजाब पुलिस के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं तो कोर्ट के लिए बचा क्या है।

एसजी- इसमें पंजाब फैसला नहीं ले सकता है। समिति के सदस्यों को जांच करने दीजिए जो तीन सप्ताह में रिपोर्ट देंगे।

सीजेआई- अगर मुख्य मुद्दा किसी न किसी पर दोषारोपण करना हो तो हम क्या कर सकते हैं। कृपया ऐसा दिखावा मत करिए जैसे कि हम इस मामले में गंभीर नहीं हैं।

एसजी- मेरे पास एक सुझाव है। अगर कोर्ट को लगता है कि कारण बताओ नोटिस पूर्वग्रहों पर आधारित हैं तो केंद्र सरकार की जांच समिति इसकी जांच करेगी और कोर्ट को रिपोर्ट करेगी। तब तक नोटिस के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी। मुझे लगता है कि यह सही रहेगा।

पटियावाला- स्वतंत्र जांच समिति का गठन किया जाना चाहिए। मुझे केंद्र सरकार की जांच समिति से कोई उम्मीद नहीं है। हम कौन सा चेहरा लेकर उस समिति के सामने जाएंगे।

सीजेआई- हमें आपस में बात करने दीजिए।

सीजेआई ने बेंच के साथी जजों के साथ बातचीत की। थोड़ी देर बाद
सीजेआी ने कहा- एक रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज जांच समिति की अगुवाई करेंगे। एनआईए के डीजी और पंजाब के अडिशनल डीजी इंटेलिजेंस ब्यूरो इसका हिस्सा होंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में दिया था यह निर्देश
ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना की अगुवाई वाली बेंच ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार के वकील और केंद्र सरकार के वकील से कहा है कि उन्होंने जांच के लिए अलग-अलग जो कमिटी बना रखी है, वो सोमवार तक अपने हाथ को रोक दें। केंद्र और राज्य सरकार ने सुरक्षा में चूक के मामले की जांच के लिए कमिटी बना रखी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो दलील दी गई है और मामला पीएम की सुरक्षा से संबंधित है। ऐसे में उचित होगा कि सभी रेकॉर्ड को पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार अपने कब्जे में लें। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के संबंधित एजेंसी सहयोग करें और तमाम रेकॉर्ड तुरंत रजिस्ट्रार जनरल के हवाले किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोमवार को आगे की सुनवाई की जाएगी।

याचिकाकर्ता की सुप्रीम कोर्ट से गुहार
याचिकाकर्ता मनिंदर सिंह ने पीएम की सुरक्षा में चूक का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठाया और गुहार लगाई कि ऐसा दोबारा न हो, यह सुनिश्चित किया जाए। सुप्रीम कोर्ट में मनिंदर सिंह ने खुद सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं। उन्होंने कहा कि घटना की तुरंत न्यायिक जांच होनी चाहिए।

क्या है मामला
ध्यान रहे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला पंजाब में फिरोजपुर के हुसैनीवाला स्थित शहीद स्मारक पार्क जाते वक्त एक फ्लाइओवर पर फंस गया। दरअसल, मौसम खराब होने के कारण प्रधानमंत्री को बठिंडा एयरपोर्ट पर उतरकर सड़क के रास्ते हुसैनीवाला जाना था जहां बीजेपी की एक चुनावी रैली आयोजित की गई थी। लेकिन कार्यक्रम स्थल से 30 किमी पहले एक फ्लाइओवर पर किसानों के एक जत्थे ने जाम लगा दिया। इस कारण काफिले को 20 मिनट तक फ्लाइओवर पर ही रुका रहना पड़ा। इसे प्रधानमंत्री के सुरक्षा में बड़ी सेंध माना गया है क्योंकि पाकिस्तान की सीमा वहां से सिर्फ 12 किमी दूर है।