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पार्लियामेंट के मानसून सेशन से एक रात पहले सरकार पर लगा विशिष्ट लोगों पर निगरानी के आरोप

भारत सरकार पर लगा विशिष्ट लोगों पर निगरानी के आरोप| टाइम ऑफ़ इंडिया ने फ्रेंच मीडिया फोर्बिडन स्टोरीज,और अमेस्टी इंटरनेशनल का हवाला देते हुए कहा है की स्पाइवेयर पेगासस, का इस्तेमाल केंद्र में दो सेवारत कैबिनेट मंत्रियों, तीन विपक्षी नेताओं, सरकारी अधिकारियों, वैज्ञानिकों और लगभग 40 पत्रकारों सहित लगभग 300 भारतीयों पर निगरानी करने के लिए किया है।

भारत सरकार ने विशिष्ट लोगों पर निगरानी के आरोपों जवाब देते हुए कहा की मीडिया रिपोर्ट कोई ठोस आधार या इससे जुड़ी सच्चाई नहीं है। आईएएनएस की एक रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख नागरिकों की जासूसी पर पत्रकारों के सवालों के जवाब में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी सचिव, राजेंद्र कुमार ने कहा: “भारत एक मजबूत लोकतंत्र है जो अपने सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार के रूप में निजता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस प्रतिबद्धता के तहत, भारत व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 को भी पेश किया है, ताकि व्यक्तियों के व्यक्तिगत डेटा की रक्षा की जा सके और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के उपयोगकर्ताओं को सशक्त बनाया जा सके।

“एक मौलिक अधिकार के रूप में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की प्रतिबद्धता भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। हमने हमेशा खुले संवाद की संस्कृति पर जोर देने के साथ एक नागरिक को सूचित करने का प्रयास किया है।

“पेगासस के उपयोग के बारे में सूचना के अधिकार के आवेदन पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया को मीडिया द्वारा प्रमुखता से रिपोर्ट किया गया है और भारत सरकार और पेगासस के बीच कथित सहयोग के बारे में किसी भी दुर्भावनापूर्ण दावों का मुकाबला करने के लिए पर्याप्त है।”

“ऐसा लगता है कि आप एक अन्वेषक, अभियोजक और साथ ही जूरी की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं,” उन्होंने लिखा।

उन्होंने आगे उल्लेख किया कि अतीत में, भारत सरकार द्वारा व्हाट्सएप पर पेगासस के उपयोग के संबंध में इसी तरह के दावे किए गए थे और उन रिपोर्टों का भी कोई तथ्यात्मक आधार नहीं था और भारतीय सर्वोच्च न्यायालय में व्हाट्सएप सहित सभी पक्षों द्वारा स्पष्ट रूप से इनकार किया गया था।उन्होंने कहा, “यह समाचार रिपोर्ट भी भारतीय लोकतंत्र और उसके संस्थानों को बदनाम करने के का एक अभियान प्रतीत होता है”।

मीडिया रिपोर्ट सही भी हो सकती है या प्रायोजित भी सकती है, रिपोर्ट का समय कुछ ऐसे है की पार्लियामेंट में मानसून सेशन शुरू होने वाले है, और दिल्ली बॉर्डर पे कुछ नेता अभी भी धरना दे रहे है। जिन लोगो की जासूसी की बात चली है उन में से कुछ लोग भीमा कोरेगाव में हुई हिंसा के आरोपी थे, कुछ पे राजद्रोह का मुकदम चल रहा है। मीडिया का एक धुर निजता के अधिकार हनन के कारण ही नहीं इसका विरोध कर रहे पर उनकी राजनीतिक संबद्धता के कारण कर रहे क्यों की कुछ लोग अर्बन नेक्सल है। मीडिया का एक धुर इसको सही भी मान रहा क्यों की ये ऐसे लोग है जो खुद तो एयर कंडिशन्ड ऑफिस में बैठ के रहते पर हिंसा फैलाने में इनकी भागीदारी बहुत होती है।