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ओलंपिक्स में 122 भारतीय खिलाड़ी , पर कितने पदक लाएगा भारत? हमारा प्रदर्शन इतना ख़राब क्यों होता है !

Bystaff

Jul 29, 2021

भारत टोक्यो 2020 ओलंपिक में भाग ले रहा है। मूल रूप से 24 जुलाई से 9 अगस्त 2020 तक होने वाले खेलों को COVID-19 महामारी के कारण स्थगित कर दिया गया था। भारत ने इन खेलों के लिए 122 प्रतियोगियों की अपनी सबसे बड़ी टुकड़ी भेजी है। जायदातर खिलाड़ी असफल हो के आ रहे है, पर क्या कारण है हम मेडल बहुत कम लाते है, मेडल जीत कर लाने वाले खिलाड़ियों का अपने देश में बहुत मान सम्मान मिलता है, पर फिर भी मेडल तालिका में में हम पीछे रहते है। रिओ ओलंपिक्स 2016 में हम बस 2 मेडल ले के आये थे, इस बार में 122 खिलाड़ियों में मेडल बहुत कम लोग ले के आएँगे, अभी तक बस 1 सिल्वर मेडल मीराबाई चानू वेट लिफ्टिंग में ले के आयी है। 

 क्या हमारे अंदर वो जज्बा नहीं की ओलंपिक्स के मेडल्स जीत सके, या योग्यता की कमी है भारतीयों में जो मेडल नहीं जीत के लाते है हम।  अगर में मेडल तालिका को ध्यान से देखेंगे तो इस बार ओलंपिक्स में 339 गोल्ड मेडल के खिलाडी जुटे है, उस में से सबसे जायदा एक्वाटिक्स में है जो 49 , एथलेटिक्स में 48। एक्वाटिक्स या ऐसे खेल जो पानी से जुड़े हो, का अगर केस स्टडी लेते है तो, भारत के बस ३ खिलाडी ओलंपिक्स के लिए क्वालीफाई किये है आज तीनो ओलंपिक्स से बहार हो गए है। टोक्यो ओलंपिक में भारत का तैराकी टीम का अभियान गुरुवार को समाप्त हो गया।

तैराक साजन प्रकाश का प्रदर्शन पुरुषों की 100 मीटर बटरफ्लाई स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए काफी नहीं था, 55 तैराकों में 46वें स्थान पर रहे।तीनों भारतीय तैराक – प्रकाश, श्रीहरि नटराज, और माना पटेल – प्रदर्शन निराशाजनक रहा , यहां तक कि अपने मुख्य कार्यक्रमों में अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय की बराबरी करने में भी विफल रहे।

प्रकाश, जो पिछले महीने टोक्यो खेलों के लिए क्वालीफाई करने के लिए ओलंपिक ‘ए’ के क्वालीफिकेशन मार्क को तोड़ने वाले पहले भारतीय बने, सोमवार को 200 मीटर बटरफ्लाई में कुल मिलाकर 24 वें स्थान पर रहे।

अपने पहले ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा कर रहे नटराज को 100 मीटर बैकस्ट्रोक में 40 तैराकों में 27वां स्थान मिला था।

माना, जिन्होंने “यूनिवर्सिटी कोटा” के माध्यम से खेलों के लिए क्वालीफाई किया था, महिलाओं की 100 मीटर बैकस्ट्रोक में कुल मिलाकर 39वें स्थान पर रही थीं।

तैराकी की अगर बात करे तो माइकल फेल्प्स एक अमेरिकी पूर्व प्रतिस्पर्धी तैराक हैं। वह कुल 28 पदकों के साथ अब तक के सबसे सफल और सबसे अलंकृत ओलंपियन हैं।फेल्प्स के नाम ओलंपिक स्वर्ण पदक(23) के सर्वकालिक रिकॉर्ड भी हैं। 2008 के बीजिंग खेलों में फेल्प्स ने आठ स्वर्ण पदक जीते, उन्होंने साथी अमेरिकी तैराक मार्क स्पिट्ज के 1972 के किसी भी एक ओलंपिक खेलों में सात गोल्ड मेडल के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। 

 भारत में तैराकी या ऐसे खेल जो पानी से जुड़े हो, उनको खेल के रूप में देखा भी नहीं जाता। अन्य देश उन खेलो पे ध्यान दे रहे जिसमे जायदा गोल्ड मेडल मिलता है पर भारत में पारम्परिक खेल जैसे कुश्ती या मुक्केबाज़ी पे ध्यान दिया जाता है, कुश्ती में पार्ट लेने वाले एथलीट्स को इज़्ज़त भी सोसाइटी में बहुत मिलती है, पर स्वर्ण पदक बहुत कम लाते है। 

भारतीय खेल नीति को बदलने का समय आ गया है, अब में स्वर्ण पदक के लिए खेलना चाहिए न की खेल का हिस्सा होने के लिए। पदक तालिका में ऊपर का स्थान उन देशो को मिला है जिनने एक्वाटिक्स और एथलेटिक्स पे ध्यान दिया है। भारत को सिर्फ गोल्ड के लिए खेलना चाहिए और उन खिलाड़ियों को प्रोत्शाहन देना चाहिए एक्वाटिक्स और एथलेटिक्स में मेडल ले के आ सके। 49 स्वर्ण पदक अगर तैराकी जैसे खेलो में है तो उस में ध्यान देना चाहिए और कम से 25,30  तैराक को तैयार करना चाहिए जो भारत को मेडल ला के दे सके और पदक तालिका में भारत को निचे की जगह ऊपर स्थान पे ले जा सके। 

गीता प्रेस गोरखपुर से श्रीरामचरितमानस ख़रीदे